5:39 مساءً الإثنين 20 مايو، 2019

وفى مجلس المستهئزين


صور وفى مجلس المستهئزين

مزمور 1 – تفسير سفر المزامير
هذا المزمور يضع امامنا طريق الموت و طريق الحياة،

 

البركة و اللعنة،

 

و يتركنا احرارا ان نختار.

 

فهو يتحدث عن سعادة الرجل الصالح و شقاوه الشرير و تعاسته.

ايه 1): “طوبي للرجل الذى لم يسلك في مشوره الاشرار و في طريق الخطاه لم يقف و في مجلس المستهزئين لم يجلس.”

طوبي للرجل = قالها بالمفرد فليس صالحا سوي المسيح و حده.

 

و نلاحظ التدرج

لا يسلك في مشوره الاشرار = اي يفكر في طريقهم و يستحسنة و يعطى ظهرة لله و هذه مخاطرة.

 

و لا يقف في طريق الخطاه = هنا حدث استحسان للشر و وجد الانسان لذة،

 

فبدا يجارى الاشرار و يخطئ.

 

و نلاحظ قوله طريق الخطاة،

 

و نقارن هذا بان المسيح هو الطريق و الحياة فالمسيح طريق الابرار،

 

و اي طريق سواة فهو طريق الشيطان،

 

طريق الموت و اللعنة.

 

لا يجلس في مجلس المستهزئين = هنا نجد الاستسلام لطريق الشر،

 

و صار الاشرار رفقاء لهذا الانسان،

 

و المستهزئين هم من يستهزئون بالامور المقدسة.

 

هنا استمرار ارادى في الشر.

 

ايه 2): “لكن في ناموس الرب مسرتة و في ناموسة يلهج نهارا و ليلا.”

قارن مع “خبات كلامك في قلبي لكي لا اخطئ اليك”،

 

فكلمه الله تحصن المسيحى من السقوط يش8:1).

 

و قوله نهارا و ليلا = يشير لكل فترات الحياة،

 

الليل و النهار ايام الفرح و ايام الحزن،

 

ايام الانتصار على الخطيه و ايام السقوط.

 

ايه 3): “فيكون كشجره مغروسه عند مجارى المياه.

 

التي تعطى ثمرها في اوانه.

 

و ورقها لا يذبل.

 

و كل ما يصنعة ينجح.”

كشجره مغروسه على مجارى المياة = راجع مت 13: 31-32 مجارى المياة اشاره للروح القدس يو37:7-39 .

 

 

هذه المياة تجرى كالعصاره و تصل الى كل الاغصان و الاوراق.

 

و قوله مجارى يشير الى انها مياة حيه جاريه تحمل معها الحياة.

 

و الشجره المثمره هي سبب بهجه لكل انسان و حيوان،

 

ثمارها تشبع و يستفاد من ظلها.

 

و نلاحظ ان المسيح هو شجره الحياة رؤ7:2 تعطى ثمرها في اوانة = قارن مع ثمار الروح القدس غل22:5).

 

و المسيح لعن التينه غير المثمرة.

 

و ورقها لا ينتثر = لان غذاءها ياتيها في حينه.

 

و المتعبين ياتون ليستظلوا بهذه الشجرة.

 

كل ما يصنعة ينجح = قارن مع “استطيع كل شيء في المسيح الذى يقويني”.

 

فمن يثبت في المسيح يكون له نجاح في كل امورة ما ديه و روحيه فالله بارك ليوسف في كل ما عمله).

 

ايه 4): “ليس كذلك الاشرار لكنهم كالعصافه التي تذريها الريح.”

العصافة= هذا وصف الاشرار،

 

فهم عكس الابرار،

 

لا يستمتعون بالمياة الجاريه فورق الشجره يذبل و يصير عصافه تحملة الريح الخفيفه اي التجارب البسيطة التي ينساق و راءها الشرير= التي تذريها الريح.

 

تصير حياتهم بلا معنى فهم كعصافه حملتها الريح.

 

ايه 5): “لذلك لا تقوم الاشرار في الدين و لا الخطاه في جماعة الابرار.”

لا تقوم الاشرار في الدين = لا يستطيعون ان يقوموا للدفاع عن انفسهم،

 

و لا يكون لهم قيام الوجود الدائم في حضره الله،

 

اذ “يقولون للجبال غطينا و للاكام اسقطى علينا من و جة الجالس على العرش” رؤ16:6،

 

17).

 

الدين = قضاء الله يوم الدينونه يو29:5).

 

ايه 6): “لان الرب يعلم طريق الابرار.

 

اما طريق الاشرار فتهلك.”

الرب يعلم طريق الابرار = العلم و المعرفه هنا هما معرفه الفرح و السرور و الموافقة.

طريق الاشرار فتهلك = الله يمهلهم فان لم يتوبوا يرذلهم و يطردهم من حضرته.

 

هذا المزمور نرنمة في صلاه باكر و نحن نذكر قيامه المسيح من الاموات لنسال الله ان يعطينا الحياة المطوبه كنعمه الهيه قبل ان نبدا حياتنا اليومية.

 

هذا المزمور يذكرنا بان الله خلق ادم اولا في صورة الكمال و لما سقط اتي المسيح ادم الاخير الكامل ليكملنا.

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